योगी के मंत्री सतीश महाना को लगा तगड़ा झटका, कोर्ट ने रद्द किया एसओ का निलंबन

इलाहबाद हाईकोर्ट ने एसपी के आदेश को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने एसपी द्वारा विधुना के एसओ शिव प्रसाद के निलंबन को गलत बताते हुए रद्द कर दिया है. योगी के मंत्री सतीश महाना के कहने पर विधुना के एसओ शिव प्रसाद को प्रभारी एसपी ने निलंबित कर दिया था. 22 अक्टूबर को मंत्री के साथ एसओ की हॉट-टॉक हुई थी. मंत्री पर आरोप लगा कि वह आरोपियों के खिलाफ दबिश न देने का बना रहे थे दबाव. याचिका में बगैर प्रारंभिक जाँच के कार्रवाई का आरोप. कोर्ट ने विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करने की छुट दी है.

गौरतलब है कि बिधून थाने के इंस्पेक्टर ने एक मामले में कैबिनेट मिनिस्टर सतीश महाना के साथ अभ्रदता कर दी थी. मंत्री ने पूरे प्रकरण की जानकारी पुलिस के अलाधिकारियों को दी थी. मंत्री के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप में कार्यवाहक एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोरव ने तत्काल प्रभाव से दरोगा का सस्पेंड करने के साथ ही मामले की जांच एसपी को सौंपी थी.

क्या था मामला

बिधनू थानाक्षेत्र के रहने वाले ग्रामीण रविवार को दरोगा शिव प्रसाद दुबे की शिकायत लेकर मंत्री सतीश महाना के पास लेकर पहुंचे. ग्रामीणों ने मंत्री को दरोगा की करतूत की जानकारी दी, जिस पर सतीश महाना ने थानाध्यक्ष शिव प्रसाद दुबे को फोन मिलाया और उनसे ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण करने को कहा. आरोप है कि मंत्री के फोन पर बात की जानकारी के बावजूद थानाध्यक्ष ने अभद्र भाषा का प्रयोग कर दिया. जिससे नाराज मंत्री ने तत्काल थानाध्यक्ष की शिकायत पुलिस के आलाधिकारियों से फोन पर की.

मामले के अधिकारियों के संज्ञान में आते ही कार्यवाहक एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोरव ने अपने स्तर से गुप्त जांच करायी. हालांकि प्राथमिक आधार पर एसओ को दोषी पाते हुए सोमवार को उनका निलम्बन आदेश जारी कर दिया गया. सीएम के आदेश के बाद कानपुर में पहली कार्रवाई दो दिन पूर्व प्रदेश सरकार ने जिले के सभी डीएम व एसएसपी को इस आशय का आदेश दिया था कि उनके थाने पर अथवा फोन पर कोई भी विधायक से लेकर मंत्री से सम्मान पूर्वक बात सुने और उन पर कार्यवाही करें.

शासन के आदेश को दरोगा ने नहीं माना, जिसके चलते उन्हें निलंबित कर दिया गया. एसएसपी ग्रोवर ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए जानकारी दी कि जांच में दरोगा पर लगे आरोप सही पाए गए. इसी के चलते उन पर कार्रवाई की गई है. एसपी साउथ को मामले की जांच सौंपी गई है. जांच में अगर दरोगा दोषी पाए गए तो उन पर मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है.


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