16 दिन, 2200 किमी का सफर, फिर भी चिराग तले अंधेरा


अमेठी/सुल्तानपुर.असगर नकी. अमेठी और सुल्तानपुर की जनता के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जब पहुंचते हैं तो “रिश्तों की दुहाई” देना नहीं भूलते. लेकिन खुद राहुल गांधी की निगाह में इन रिश्तों का कितना महत्व है उसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि गांधी ने किसान यात्रा के नाम पर प्रदेश के अंदर 16 दिन गुज़ारे और 2200 किलोमीटर की लम्बी दौड़ लगाई. परन्तु पारिवारिक रिश्तों वाले ज़िले सुल्तानपुर और अमेठी ज़िले की सरहदों से गांधी गुज़रे और चिराग तले अंधेरा कर गए.


प्रदेश में कांग्रेस के किसान यात्रा रथ का प्रथम दौर का पहिया शुक्रवार को रुका. इस प्रथम दौर में किसान यात्रा रथ के महावत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रहे. जिन्होंने अमेठी और सुल्तानपुर ज़िले के साथ सौतेला व्यवहार किया. दोनों ज़िलो की सरहदों रायबरेली और फैज़ाबाद तक राहुल गांधी किसान यात्रा लेकर पहुंचे किंतु इन ज़िलो में राहुल ने आना मुनासिब नहीं समझा. जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में अमेठी में जहाँ दो सीटें मिल भी गई थी वहीं सुल्तानपुर में तो कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिली थी.

उससे भी अहम बात यह कि खुद राहुल गांधी जिस अमेठी लोकसभा से अब तक तीन लाख वोटों से जीतते आ रहे थे, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उसी अमेठी से राहुल को 70 से 75 हज़ार वोटों की जीत नसीब हुई थी. जबकि सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर तो कांग्रेस प्रत्याशी की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी.

जहां राहुल गांधी की जीत के ग्राफ में कमी आ गई वहां क्या सोचकर किसान यात्रा का खाका तैयार हुआ की इन दो ज़िलो के आसपास राहुल आए और यहां नहीं पहुंचे? क्या राहुल को ये यकीन है कि इस बार दोनों ज़िलो की स्थित बेहतर है? यदि ऐसा है तो सिर्फ ये भ्रम है जिसमें कांग्रेस है और इस बार भी दोनों ज़िलो में स्थित और बत्तर होने वाली है.


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