चुनाव से पहले माया ने मारी फिर मारी बाजी, कोंग्रेस का यह विधायक हुआ बसपा में शामिल


असगर नकी,अमेठी. एक ओर जहां नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार को राजगद्दी और बैठाने वाले प्रशांत किशोर के मास्टर प्लान के अनुरूप यूपी की बेहाली ख़त्म करने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी किसान सभा आयोजित कर कांग्रेस की बिखरी ज़मीन संजोने में जुटे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ राहुल की अमेठी लोकसभा के तिलोई विधानसभा सीट पर उनके ही नेता ने बिखड़कर कांग्रेस को ही बेहाल कर दिया हैं.


बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में तिलोई सीट से कांग्रेस डा. मुस्लिम ने सपा प्रत्याशी मयंकेश्वर सिंह को शिकस्त देकर खुद को इस सिट का दावेदार साबित किया और विधायक बने. लेकिन 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले विधायक मुस्लिम ने कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया और अचानक पार्टी की अलविदा कहकर बड़े ही सम्मान के साथ राज्यसभा सांसद मायवती की पार्टी बसपा का दामन थाम लिया.

दरअसल उसकी वजह ये है कि विधायक उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां उनके आगे का सफर संकट भरा है. इसलिये उन्होने कांग्रेस को छोड़ा और बसपा को पकड़ा।सूत्र बताते हैं कि विधायक ने ये क़दम अपने बेटे के राजनैतिक कैरियर के लिए उठाया है और अपनी विरासत बेटे को सुपुर्द कर बसपा से टिकट दिला उसे विधायक बनाना चाहते हैं. उधर बसपा नेता हाजी इम्तियाज जो कि तिलोई से बसपा के चुनाव प्रभारी बनाये गए थे अब वो कांग्रेस में आ चुके हैं. ये भी कांग्रेस वोट ग्राफ बढ़ाने नहीं अपने कद को बढ़ाने और विधायक बनने की लालसा में पार्टी में आए हैं.

इसकी मुख्य वजह ये कि तिलोई सीट मुस्लिम बाहुल्य है और हमेशा से यहाँ चुनाव विकास के मुद्दों से इत्र जातिवाद पर आधारित रहा. पिछले आंकडे पर यदि गौर किया जाये तो इस सीट पर विकास से ज्यादा जातिवाद को तरजीह दिया गया है. जिसके चलते अब तक इस सीट पर 7 बार क्षत्रिय विधायक व 9 बार मुस्लिम विधायकों ने बाजी मारी.

खैर दिलचस्प बात ये कि बसपा ने डा. मुस्लिम को तोड़ा तो कांग्रेस इस पर चुप नहीं रही. कांग्रेस ने बसपा में सेंधमारी करते हुए बसपा के नदीम अशरफ को तोड़ लिया. तो वहीं सपा अपने पुराने प्रत्याशी मयंकेश्वर सिंह पर पुनः दांव खेलने को तैयार दिख रही है.

जबकि बीजेपी कि हालत तो ये है कि एक अनार सौ बीमार वाले हालात दिख रहे हैं. महेंद्र सिंह जो कि पिछले विधानसभा चुनाओं में दलबदलू नेता के रूप में अपनी छवि पेश कर चुके हैं, बसपा, कांग्रेस और पुनः बीजेपी में शामिल हैं. ये भी दावेदारों की कतार में लगे हैं।इनके अलावा राकेश त्रिपाठी, भवानी दत्त दीक्षित व युवा नेता सुनील सिंह भी जनता के बीच अपनी गहरी पकड़ होने का दावा कर खुद को टिकट का मजबूत दावेदार बता रहे हैं.


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