…तो ये है मायावती की दलित-मुस्लिम वोटरों को लुभाने की नई रणनीति


यूपी में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष होने वाली है. मगर इसमें जीत हासिल करने के लिए तमाम सियासी दलों ने अभी से ही रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है. इसी का एक उदाहरण बुध पूर्णिमा को देखने को मिला. जहां इस अवसर पर बसपा के तरफ से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को राजधानी लखनऊ में आयोजित बुद्ध विहार के प्रार्थना सभा में भेजा गया.
राजनीति के जानकारों का इस मामले में यह कहना है कि यह बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमों का एक पॉलिटिकल स्टंट है और इसे स्टंट को करने का मकसद मायावती का दलित मुस्लिमों के वोट बैंक को अपनी पार्टी के तरफ करने का माना जा रहा है.


बताया जा रहा है दिल्ली में शुक्रवार को पार्टी के बड़े नेताओं और मायावती से मुलाकात करने के बाद सिद्दीकी शनिवार की सुबह ही लखनऊ के रवाना हो गए. फिर बुद्ध विहार पहुँचने के बाद उन्होंने बुद्ध पूर्णि‍मा के अवसर पर आयोजित प्रार्थना सभा में हिस्‍सा लेते हुए भगवान बुद्ध के चरणों पुष्‍प अर्पित किए. साथ हीं उन्होंने भगवान बुद्ध पर चढ़ाई गई खीर(प्रसाद) भी खाई. इस बात की पुष्टि बसपा से लखनऊ के जिला संयोजक हरि कृष्ण गौतम द्वारा की गई है.

इस मामले में पार्टी के बड़े नेता का कहना है कि “जिन लोगों ने बौद्ध धर्म स्‍वीकार किया है, वे पिछले कई सालों से बुद्ध विहार में प्रार्थना करने आते हैं. लेकिन अब बसपा सदस्‍य उनके साथ उनके कार्यक्रमों में शामिल होना चाहते हैं.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में बढती नफरत और साम्‍प्रदायिकता के बिरुद्ध बौद्ध धर्म एक बड़ा मिसाल बन गया है. इस मामले में सूत्रों का यह मानना है कि मायावती इस तरह से बुद्ध विहार के कार्यक्रम में एक मुस्लिम नेता को भेज कर ‘मुसलमान और दलितों’ को अपनी पार्टी के समर्थन में खड़ा करना चाहती है.

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